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*मिशन पुनर्मिलन : संवाद और ध्यान से किशोरी ने परिवार के पास लौटने की जताई इच्छा*

*पारिवारिक डांट से परेशान होकर घर से निकली थी 16 वर्षीय किशोरी, दो दिन वन स्टॉप सेंटर में मिली सुरक्षित देखरेख*

*मिशन पुनर्मिलन : संवाद और ध्यान से किशोरी ने परिवार के पास लौटने की जताई इच्छा*

*पारिवारिक डांट से परेशान होकर घर से निकली थी 16 वर्षीय किशोरी, दो दिन वन स्टॉप सेंटर में मिली सुरक्षित देखरेख*

खंडवा। पारिवारिक डांट से परेशान होकर घर से निकली 16 वर्षीय किशोरी खंडवा पहुंच गई। जीआरपी द्वारा उसे बाल कल्याण समिति के समक्ष प्रस्तुत किया गया। समिति ने आवश्यक संरक्षण के तहत किशोरी को दो दिन वन स्टॉप सेंटर में सुरक्षित एवं अनुकूल वातावरण उपलब्ध कराया।

मिशन पुनर्मिलन के तहत बाल कल्याण समिति अध्यक्ष प्रवीण शर्मा तथा सदस्य मोहन मालवीय, रुचि पाटिल और स्वप्निल जैन ने किशोरी से संवेदनशील संवाद किया। उसे भयमुक्त वातावरण देते हुए उसकी बात सुनी गई और घर छोड़ने की परिस्थितियों को समझने का प्रयास किया गया।

*एक मिनट का ध्यान, फिर संवाद*

काउंसलिंग के दौरान किशोरी को करीब एक मिनट का सरल ध्यान अभ्यास प्रवीण शर्मा द्वारा कराया गया। उसे कुछ क्षण शांत होकर अपनी सांसों पर ध्यान देने और अपनी भावनाओं पर विचार करने का अवसर दिया गया। इसके बाद धैर्य, आत्मबोध, सकारात्मक सोच और परिवार के साथ संवाद के महत्व पर बातचीत की गई।

काउंसलिंग के बाद किशोरी ने परिवार के पास लौटने की इच्छा व्यक्त की। समिति ने उसकी राय, सुरक्षा और सर्वोत्तम हित को ध्यान में रखते हुए परिजनों से संपर्क किया। आवश्यक प्रक्रिया पूरी होने के बाद किशोरी को सुरक्षित रूप से परिजनों के सुपुर्द कर दिया गया।

*एक्सपर्ट व्यू : बच्चे को बदलना नहीं, पहले समझना जरूरी… प्रवीण शर्मा*

बाल संरक्षण के दृष्टिकोण से घर छोड़ने वाले बच्चे के साथ दबाव के बजाय सुरक्षित वातावरण, धैर्यपूर्वक सुनना और संवेदनशील संवाद जरूरी है। एक मिनट का ध्यान उसे कुछ क्षण शांत होकर सोचने का अवसर दे सकता है, लेकिन इसे अकेले परिणाम का कारण मानना उचित नहीं होगा। इस मामले में सकारात्मक दिशा संवाद, भावनात्मक सहयोग और किशोरी की स्वयं की इच्छा से बनी।

समिति अध्यक्ष प्रवीण शर्मा ने कहा कि बाल संरक्षण का उद्देश्य बच्चे पर निर्णय थोपना नहीं, बल्कि उसे सुरक्षित और सम्मानजनक वातावरण देना है, ताकि वह अपनी भावनाओं को व्यक्त कर सके और उपलब्ध विकल्पों पर स्वयं विचार कर सके।

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